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जंगल में मंगल देसी

जंगल में मंगल देसी, भिखारी- अरे नहीं मेरी जान.. छेद क्यों नहीं मिलेगा.. क्या कभी सुना है.. साँप को बिल कोई और बताता है.. वो खुद ब खुद ढूँढ लेता है.. मैं सोच रहा हूँ तेरी गाण्ड क्या ज़बरदस्त है.. एकदम मक्खन की तरह.. अबकी बार गाण्ड ही मारूँगा। रिंकू- मेरी जान आज रविवार है.. कल की चुदाई भूल गई क्या.. चल लगा फ़ोन डॉली को और वहीं बुला ले.. आज पूरा दिन तीनों वहाँ मज़े करेंगे।

अब मैं बिल्कुल नंगा दो नंगी हसिनाओं के साथ एक ही बिस्तार पर मौजूद था। नज़ीला भाभी ने चॉकलेट रंग के पेंसिल हील के सैंडल पहने हुए थे और उनकी ननद ज़हरा ने सफेद रंग के ऊँची हील के सैंडल। दोनों का नंगा हुस्न देखकर मैं तो पागल हो गया। डॉली- तब तो ठीक है.. आप भी मुझे रंडी बोल सकते हो.. अच्छा सर एक बात और.. अब इम्तिहान आने वाले हैं और इस बार बोर्ड के इम्तिहान हैं मैं पास तो हो जाऊँगी ना…

एक ने मेरी चूत में ऊँगली डाल दी, एक ने गाण्ड में अंगूठा घुसा दिया और हाथों की उंगलियों और हथेलियों से मेरी गोल-गोल गाण्ड को मसल कर मज़े लेने लगा। जंगल में मंगल देसी पता नहीं भाभी? पर बस रहा ही नहीं जाता। तुम्हारे ननदोई जी भी अब चोद नहीं पाते हैं सही से तो रसोई के बैंगन खीरे और मूली से ही काम चला रही हूँ।

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  1. ‘ह्म्म्म… तभी तो आजकल आपके पास हमारे लिए समय ही नहीं होता वरना यूँ इतने दिनों के बाद घूर घूर कर देखने की जरूरत नहीं पड़ती, मानो कभी देखा ही ना हो!’ अपने हाथों को खोलते हुए अपनी चूचियों को एक बार और उभारते हुए उसने एक लम्बी सांस के साथ मेरी नज़रों में झाँका।
  2. बहुत चिचिया रही है यह रंडी इसका मुँह बंद करना पड़ेगा कहकर मंजू माँ के मुँह पर चढ कर बैठ गयी अपनी चूत माँ के मुँह पर रख कर उसने अम्मा की बोलती बंद कर दी और फिर जांघें आपस मे कस कर माँ का सिर अपनी जांघों मे दबा लिया फिर उचक उचक कर माँ की मुँह चोदने लगी भारत की नागरिकता कैसे मिलती है
  3. ज्योति मेरे बगल में आकर खड़ी हुई और मेरा हाथ पकड़ कर बाकी सब की तरफ देख कर बोलने लगी- दोस्तो, हमारे समीर जी बहुत अच्छा गाते हैं और उनके गानों की तारीफ़ मैंने कई बार सुनी है… तो आज इनकी सजा यही है कि आज मेरे जन्मदिन के मौके पर समीर जी हम सबको एक प्यारा सा गाना सुनायेंगे… तालियाँ ! ‘तू चिंता न कर वन्दना, मैं इनका पूरा ख्याल रखूँगी… आखिर ये हमारे पड़ोसी हैं और हमारा फ़र्ज़ बनता है कि हम इन्हें कोई तकलीफ न होने दें।’ रेणुका ने वन्दना को समझाते हुए कहा।
  4. जंगल में मंगल देसी...रिंकू- नहीं मेरी जान.. लौड़े को इतना क्यों चुसवाया.. पता है.. ताकि ये तेरी गाण्ड में जाने के लिए तड़पे.. तब तेरी गाण्ड मारने का मज़ा दुगुना हो जाएगा.. फिर धीरे से अपना हाथ मेरे अंडरवीयर के अंदर डाल कर लण्ड को सहलाने लगी ! फिर मैंने भी उनके शरीर को छूना शुरू कर दिया, धीरे धीरे मैं उनके मम्मे को दबाने लगा। फिर मैं चाची के ब्लाउज़ के हुक खोलने लगा, वह मेरे बड़े लंबे लण्ड के साथ खेलने में मस्त थी।
  5. मैं उसकी बातों से शरमा रही थी। तभी उसका हाथ धीरे से बढ़ा और मेरे हाथ से टकरा गया। मुझ पर तो जैसे हजारों बिजलियाँ टूट पड़ी। मैं तो जैसे पत्थर की बुत सी हो गई थी। मैं पूरी कांप उठी। उसने हिम्मत करते हुये मेरे हाथ पर अपना हाथ जमा दिया। पानी पी कर वोह बोली, जी मेरा नाम सना खान है और मुझे एक कनज़्यूमर कंपनी ने भेजा है सर्वे के लिये। क्या आप मेरे कुछ सवालों का जवाब दे देंगे?

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भिखारी- डरना पड़ता है बेटी.. तुम ठहरी पैसे वाली और मैं एक गरीब आदमी.. कोई आ गया तो तुमको कोई कुछ नहीं कहेगा.. मैं फालतू में मारा जाऊँगा।

डॉली- बहुत अच्छी सोच है.. ओके.. अब मैं जाती हूँ लेकिन प्लीज़ अपने दोस्तों को अभी मत बताना कि आज क्या हुआ.. इसमें प्रिया की भी बदनामी होगी। दोनों वहाँ से वापस कमरे में आ जाते हैं, तब तक डॉली भी अच्छे से चूत की सिकाई करके नहा कर रूम में आ जाती है।

जंगल में मंगल देसी,मैं तब हीना से बोला, रानी तेरी चूचियाँ इतनी दबाने के बाद अब लंगड़ा-आम नहीं रहीं, अब ये तो चौसा या फ़ज़ली आम हो गयी हैं। वैसे जो भी हो इनका रस बहुत ही मीठा है। मज़ा आ गया तेरी चूचियों का रस पी कर।

रिंकू तो नॉर्मल था मगर उन दोनों ने आज तक ऐसा नजारा नहीं देखा था। उनकी हालत खराब हो गई लौड़े में तनाव बढ़ने लगा.. कुछ तो गोली का असर और कुछ डॉली के यौवन का असर बेचारे दो-धारी तलवार से हलाल हो रहे थे।

सिपाही कमरे में घुसा और कमरा तलाशने लगा, मेरे पास आया और सर झुका कर कहने लगा- क्षमा कीजिए महारानी जी ! यहाँ कोई नहीं है..!!ఇంగ్లీష్ అమ్మాయిలు

राजू का लण्ड लकड़ी के डण्डे की तरह कड़क था। राजू चूमते-चूमते मेरी जांघों पर पहुँच गया और उसने अपने होंठ मेरी चूत पर रख दिए। ‘अब चुप हो जाओ और चलने की तैयारी करो, मैं बस थोड़ी देर में आया!’ इतना कह कर मैंने उसे उठाया और अपने घर जाने के लिए कहा।

मैं कुछ देर सोचती रही और फिर अपने आप को उसके बदन को छूने से नहीं रोक पाई और बोली- लया साबुन इयाँ दे... यो मेरो रंग है इया कौनी उतरेगो !

इतने मे रघू वापस आ गया मुझे भी ज़ोर से पेशाब लगी थी मैं बैठा बैठा कसमसा रहा था बोला रघू, ज़ोर से लगी है, मा और मंजू बाई कब आएँगी? मैं बाहर कर आऊ?,जंगल में मंगल देसी मीना चाची मेरे होंठों को प्यार से चूमते हुए बोली, सुनील तूने बात तो बहुत सही कही है और मैं नहीं चाहती कि सोनिया भी मेरी तरह इसी आग में जले। चल तू चिंता मत कर उसे वापस आने दे। मैं मौका देख कर उसे तैयार कर लुँगी!

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